धर्म-स्वातंत्र्य का अधिकार
अनुच्छेद 25
1.
सार्वजनिक व्यवस्था सदासार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के दूसरे अन्त:करण उपबन्धों के
अधीन रहते हुए व्यकितयों की स्वतंत्रता का तथा धर्म के अवाध रूप से मानने, आचरण,
करने और प्रचार करने का समान हक होगा।
2.
इस अनुच्छेद की कोर्इ बात किसी ऐसी वर्तमान विधि के प्रवर्तन पर प्रभाव अथवा राज्य
के लिए किसी ऐसी विधि के बनाने में रूकावट न डालेगी
जो-
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धार्मिक आचरण से सम्बद्ध किसी आर्थिक वित्तीय, राजनैतिक अथवा अन्य किसी प्रकार
की लौकिक क्रियाओं का विनियमन अथवा निर्बन्धन करती
है |
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सामाजिक कल्याण और सुधार उपबनिधत करती हो, अथवा हिन्दुओं की सार्वजनिक प्रकार
की धर्म- संस्थाओं को हिन्दुओं के सब वर्गो और विभागों के लिये खोलती
हो |
व्याख्या- 1 कृपाण धारण करना तथा लेकर चलना सिक्ख धर्म के मानने को अंग समझ जायेगा
व्याख्या-2 खण्ड (2) के उपखण्ड (ख) में हिन्दुओं के प्रति निर्देश में सिक्ख, जैन
या बौद्ध धर्म के मानने वाले व्यकितयों का भी निर्देश अन्र्तगत है तथा धर्म संस्थओं
के प्रति निर्देश का अर्थ भी तदनुकूल ही किया जायेगा
अनुच्छेद 26
सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन रहते हुए प्रत्येक सम्प्रदाय अथवा
उसके किसी विभाग को-
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धार्मिक और पूर्व- प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण का |
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अपने धार्मिक कार्यो सम्बन्धी विषयों का प्रबन्ध करने का |
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जंगम और स्थावर सम्पतित के अर्जन और स्वामित्व का तथा |
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ऐसी सम्पतित के विधि अनुसार प्रशासन करने का अधिकार होगा |
अनुच्छेद 27
कोर्इ भी व्यकित ऐसे करों को देने के लिये बाध्य नहीं किया जायेगा जिनके आगम किसी
विशेष धर्म अथवा धार्मिक सम्प्रदाय की उन्नति या पोषण में व्यय करने के लिये विशेष
रूप से विनियुक्त कर दिये गये हो।
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राज्य- निधि से पूरी तरह से पोषित किसी भी शिक्षा संस्था में कोर्इ धार्मिक शिक्षा
न दी जायेगी |
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खण्ड (1) की कोर्इ बात ऐसी शिक्षा- संस्था पर लागू न होगी जिसका प्रशासन राज्य करता
हो किन्तु ऐसे धर्मस्व या न्याय के अधीन स्थापित हुर्इ है जिसके अनुसार उस संस्था
में धार्मिक शिक्षा देना आवश्यक है। |
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राज्य से अभिज्ञात अथवा राज्य-निधि से सहायता पाने वाली शिक्षा-संस्था में उपसिथत
होने वाले किसी व्यकित को ऐसी संस्था में दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा में भाग लेने
के लिये अथवा किसी संस्था में या उससे संलग्न स्थान में की जाने वाली धार्मिक
उपासना में उपसिथत होने के लिये बाध्य न किया जायेगा, जब तक कि उस व्यकित न या यदि
वह अवयस्क हो तो उसके संरक्षक ने इसके लिय अपनी सहमति
न दे दी हो |
संस्कृति और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार
अनुच्छेद 29
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भारत के राज्य-क्षेत्र अथवा उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी विभाग को
जिस की अपनी विशेष भाषा लिपि या संस्कृति हैं, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा |
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राज्य द्वारा पोषित अथवा राज्य-निधि से सहायता पाने वाली किसी शिक्षा-संस्था
में प्रवेश से किसी भी नागरिक को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा अथवा इनमें से किसी
के आधार पर वंचित न रखा जायेगा |
अनुच्छेद
30
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धर्म या भाषा पर आधारित सब अल्पसंख्यक वर्गो का अपनी रूचि की शिक्षा संस्थाओं
की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा। |
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शिक्षा- संस्थओं को सहायता देने में राज्य किसी विधालय के विरूद्व इस आधार पर
विभेद न करेगा कि वह धर्म या भाषा पर आधारित किसी अल्पसंख्यक वर्ग के प्रबन्ध
में है |
उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के मा0 अध्यक्ष ने 03.10.2003 को कार्यभार ग्रहण कर लिया
है तथा चार सदस्यों द्वारा भी 03.10.2003 को कार्यभार ग्रहण कर लिया गया है आयोग
द्वारा अल्पसंख्यकों के हितो की रक्षा के लिए एक विस्तृत कार्य योजना बनायी जायेगी